मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

नया समाचार चैनल "ख़बरें अभी तक" शुरू

हिंदी समाचार चैनल "ख़बरें अभी तक" का प्रसारण १४ जनवरी २०१२ से चार राज्यों हरियाणा, पंजाब,उत्तराखंड और हिमाचल के लिए आरम्भ हो गया है। उक्त चैनल के प्रबंध निदेशक श्री एच पी यादव है। ख़बरें अभी तक चैनल के शुभारम्भ पर प्रबंध निदेशक श्री यादव को शुभकामना देने पूर्व मुख्यमंत्री बिहार सरकार और सदी के महानतम रेल मंत्री भारत सरकार श्री लालू प्रसाद यादव, जनता दल यु के राष्ट्रिय अध्यक्ष श्री शरद यादव भी पंहुचे। पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार श्री ॐ प्रकाश चौटाला भी पंहुचे।
प्रस्तुति:- वंदना यादव

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

शिव के अवतार अश्वथामा

महाभारत युध्द से पहले द्रोणाचार्य अनेक स्थानो मे भ्रमण करते हुए हिमालय की गोद में देहरादून आ गए थे ।वहा तमसा नदी के किनारे एक दिव्य गुफा मे तपेश्वर नामक जगह पर तपस्या किया। द्रोण के तपस्या से खुश हो कर शिव ने द्रोण को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। कुछ समय बाद माता कृपि ने एक सुन्दर तेजश्वी बाल़क को जन्म दिया। जन्म ग्रहण करते ही इनके कण्ठ से हिनहिनाने की सी ध्वनि हुई जिससे इनका नाम अश्वत्थामा पड़ा। जन्म से ही अश्वत्थामा के मस्तक में एक अमूल्य मणि विद्यमान थी जो कि उसे दैत्य, दानव, शस्त्र, व्याधि, देवता, नाग आदि से निर्भय रखती थी। महाभारत युध्द के समय अश्वत्थामा ने द्रोणाचार्य वध के पश्चात अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए पाण्डवो पर नारायण अस्त्र का प्रयोग किया था। जिसके आगे सारी पाण्डव सेना ने हथियार डाल दिया था अश्वत्थामा ने द्रोपदी के पाँचो पुत्र और द्युष्टद्युम्न का सोते अवशता में ही वध कर दिया अश्वत्थामा ने अभिमन्यु पुत्र परीक्षित पर बह्मशीर्ष अस्त्र का प्रयोग किया। अश्वथामा छुप कर पांडवों के शिविर में पहुँचा और घोर कालरात्रि में कृपाचार्य तथा कृतवर्मा की सहायता से पांडवों के बचे हुये वीर महारथियों को मार डाला। केवल यही नहीं, उसने पांडवों के पाँचों पुत्रों के सिर भी अश्वत्थामा ने काट डाले। अश्वत्थामा के इस कुकर्म की सभी ने निंदा किया था ।पुत्रों के हत्या से दुखी द्रौपदी विलाप करने लगी। उसके विलाप को सुन कर अर्जुन ने उस नीच कर्म हत्यारे ब्राह्मण के सिर को काट डालने की प्रतिज्ञा की। अर्जुन की प्रतिज्ञा सुन अश्वत्थामा भाग निकला। श्रीकृष्ण को सारथी बनाकर एवं अपना गाण्डीव धनुष लेकर अर्जुन ने उसका पीछा किया। अश्वत्थामा को कहीं भी सुरक्षा नहीं मिली तो भय के कारण उसने अर्जुन पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया। अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र को चलाना तो जानता था पर उसे लौटाना नहीं जानता था।
उस अति प्रचण्ड तेजोमय अग्नि को अपनी ओर आता देख अर्जुन ने श्रीकृष्ण से विनती की, “हे जनार्दन! आप ही इस त्रिगुणमयी श्रृष्टि को रचने वाले परमेश्वर हैं। श्रृष्टि के आदि और अंत में आप ही शेष रहते हैं। आप ही अपने भक्तजनों की रक्षा के लिये अवतार ग्रहण करते हैं। आप ही ब्रह्मास्वरूप हो रचना करते हैं, आप ही विष्णु स्वरूप हो पालन करते हैं और आप ही रुद्रस्वरूप हो संहार करते हैं। आप ही बताइये कि यह प्रचण्ड अग्नि मेरी ओर कहाँ से आ रही है और इससे मेरी रक्षा कैसे होगी?”
श्रीकृष्ण बोले, “है अर्जुन! तुम्हारे भय से व्याकुल होकर अश्वत्थामा ने यह ब्रह्मास्त्र तुम पर ब्रह्मास्त्र से तुम्हारे प्राण घोर संकट में है। वह अश्वत्थामा इसका प्रयोग तो जानता है किन्तु इसके निवारण से अनभिज्ञ है। इससे बचने के लिये तुम्हें भी अपने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना होगा क्यों कि अन्य किसी अस्त्र से इसका निवारण नहीं हो सकता।”
श्रीकृष्ण की इस मंत्रणा को सुनकर महारथी अर्जुन ने भी तत्काल आचमन करके अपना ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया। दोनों ब्रह्मास्त्र परस्पर भिड़ गये और प्रचण्ड अग्नि उत्पन्न होकर तीनों लोकों को तप्त करने लगी। उनकी लपटों से सारी प्रजा दग्ध होने लगी। इस विनाश को देखकर अर्जुन ने दोंनों ब्रह्मास्त्रों को लौटा कर शांत कर दिया और झपट कर अश्वत्थामा को पकड़ कर बाँध लिया। श्रीकृष्ण बोले, “हे अर्जुन! धर्मात्मा, सोये हुये, असावधान, मतवाले, पागल, अज्ञानी, रथहीन, स्त्री तथा बालक को मारना धर्म के अनुसार वर्जित है। इसने धर्म के विरुद्ध आचरण किया है, सोये हुये निरपराध बालकों की हत्या की है। जीवित रहेगा तो पुनः पाप करेगा। अतः तत्काल इसका वध करके और इसका कटा हुआ सिर द्रौपदी के सामने रख कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी करो।”
श्रीकृष्ण के इन शब्दों को सुनने के बाद भी धीरवान अर्जुन को गुरुपुत्र पर दया ही आई और उन्होंने अश्वत्थामा को जीवित ही शिविर में ले जाकर द्रौपदी के सामने उपस्थित किया। पशु की तरह बँधे हुये गुरुपुत्र को देख कर ममतामयी द्रौपदी का कोमल हृदय पिघल गया। उसने गुरुपुत्र को नमस्कार किया और उसे बन्धनमुक्त करने के लिये अर्जुन से कहा, “हे आर्यपुत्र! ये गुरुपुत्र हैं। अर्जुन ने अश्वत्थामा को जीवित ही शिविर में ले जाकर द्रौपदी के सामने उपस्थित किया। पशु की तरह बँधे हुये गुरुपुत्र को देख कर ममतामयी द्रौपदी का कोमल हृदय पिघल गया। उसने गुरुपुत्र को नमस्कार किया और उसे बन्धनमुक्त करने के लिये अर्जुन से कहा, “हे आर्यपुत्र! ये गुरुपुत्र हैं। गुरु सदा पूजनीय होता है और उसके पुत्र की हत्या करना पाप है। आपने इनके पिता ही इन अपूर्व शस्त्रास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया है। पुत्र के रूप में आचार्य द्रोण ही आपके सम्मुख बन्दी रूप में खड़े हैं। इनका वध करने से इनकी माता कृपी मेरी तरह ही कातर होकर पुत्र शोक में विलाप करेगी। पुत्र से विशेष मोह होने के कारण ही वह द्रोणाचार्य के साथ सती नहीं हुई। कृपी की आत्मा निरन्तर मुझे कोसेगी। इनके वध करने से मेरे मृत पुत्र लौट कर तो नहीं आ सकते! अतः आप इन्हें मुक्त कर दीजिये।”
द्रौपदी के इन न्याय तथा धर्मयुक्त वचनों को सुन कर सभी ने उसकी प्रशंसा की किन्तु भीम का क्रोध शांत नहीं हुआ। इस पर श्रीकृष्ण ने कहा, “हे अर्जुन! शास्त्रों के अनुसार आततायी को दण्ड न देना भी पाप है। पापी की जाती नहीं होती है । ब्राहमण होकर भी अश्वथामा के कर्म समाज के लिए खतरनाक है ।अतः तुम वही करो जो उचित है।” उनकी बात को समझ कर अर्जुन ने अपनी तलवार से अश्वत्थामा के सिर के केश काट डाले और उसके मस्तक की मणि निकाल ली। मणि निकल जाने से वह श्रीहीन हो गया। श्रीहीन तो वह उसी क्षण हो गया था जब उसने बालकों की हत्या की थी किन्तु केश मुंड जाने और मणि निकल जाने से वह और भी श्रीहीन हो गया और उसका सिर झुक गया। अर्जुन ने उसे उसी अपमानित अवस्था में शिविर से बाहर निकाल दिया। कई धार्मिक शास्त्रों में अश्वथामा को शिव का अवतार बताया गया है। अश्वथामा दुर्योधन का मित्र था। दुर्योधन को पता था की कर्ण को राजा बनाये जाने से अश्वथामा को भी लगता था की दुर्योधन के साथ रहने से वह भी राजा बनेगा। इसलिए भी अश्वथामा कौरव के साथ हमेशा रहा।

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

बिहार में डाक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया.
















बिहार परिमंडल द्वारा आयोजित डाक प्रदर्शनी के सुअवसर पर बिहार के राज्यपाल श्री देवानंद कुंवर , चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्रीमती कावेरी बनर्जी, डाक निदेशक श्री अनिल कुमार सम्मलित हुए ।








सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

एस एम् आर सी के कालेज में चेक वितरण 2012



बिहार के समस्तीपुर शहर के प्रतिष्ठित कालेज एस एम् आर सी के कालेज में कर्मचारियों को वेतन चेक द्वारा वितरण कर किया गया। कालेज के प्राचार्य डॉविनय कुमार यादव जी, जद यु के विधान पार्षद श्री विनोद चौधरी और समस्तीपुर के प्रख्यात शिक्षाविद डॉ दिनेश्वर प्रसाद यादव जी चेक प्रदान करते हुए।

डाक निरीक्षक २०११ के परीक्षा का परिणाम

भारतीय डाक विभाग के (विभागीय) डाक निरीक्षक की परीक्षा २०११ का परिणाम आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। किसी भी प्रकार की परीक्षा की पूरी प्रक्रिया अति गोपनीय होती है। भारतीय डाक विभाग ने २०११ से विभागीय परीक्षा करने का पुर्नभार सी एम् सी नामक संस्था को दे दिया है। सी एम् सी ने सबसे पहले ग्रुप-बी और डाकपाल ग्रेड प्रथम की परीक्षा का परिणाम एक माह के भीतर ही डाक विभाग को सुपुर्द कर दिया था। जब डाक निरीक्षक परीक्षा हुआ तो कुछ लोग जो चर्चा में बने रहना पसंद करते है बोलने लगे एक माह से पहले परिणाम आ जाएगा। पूर्व में लिए गए परीक्षा के अनुभव पर लोग अपने अपने विचार प्रस्तुत कर रहे थे । अब कुछ ही दिनों पहले फिर अफवाह आई की फरवरी के तीसरे हफ्ते में परिणाम आ जाएगा । मजेदार बात यह है की जब फरवरी का तीसरा हफ्ता बीत गया है तो फिर अफवाह आ रही है की अब निकट भविष्य में परिणाम आने की संभावना है।
मुझे समझ नहीं आ रहा है की क्या सस्ती लोकप्रियता इतनी जरुरी है क्या ? जो लोग इस प्रकार का अफवाह फैला रहे है वो डाक विभाग के विभागीय परीक्षा में बैठे परीक्षार्थी के भावना के साथ खिलवाड़ कर रहे है। मैं आशा करती हूँ कि डाक निरीक्षक २०११ के परीक्षा के परिणाम शीघ्र निकले ताकि अफवाह का बाजार बंद हो ।
प्रस्तुति- वंदना यादव, स्वतंत्र लेखक

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

डाक प्रदर्शनी का शुभारम्भ



बिहार डाक परिमंडल द्वारा आयोजित डाक प्रदर्शनी २०१२ के अवसर पर चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्रीमती कावेरी बनर्जी शुभारम्भ करते हुए।

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

आई कार्ड जरुरी होता है.

AC कोच में सफर करते समय पहचानपत्र जरूर रखें।
रेल मंत्रालय ने 15 फरवरी से वातानुकूलित (एसी) श्रेणी की बोगियों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए मूल पहचानपत्र साथ रखना अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। रेल मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार एसी-3 टियर, एसी-2 टियर, प्रथम श्रेणी एसी, एसी चेयर कार और विशेष श्रेणी में सीट आरक्षित कराने वाले यात्रियों में से समूह के किसी एक यात्री को यात्रा के दौरान नौ तरह के पहचानपत्रों (मूल) में से कोई एक अपने पास रखना होगा।यात्रा के दौरान पहचानपत्र मांगे जाने पर एसी श्रेणी के यात्रियों को मूल पहचानपत्र प्रस्तुत करना होगा। मूल पहचानपत्र प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में इन यात्रियों को बिना टिकट समझा जाएगा और उस हिसाब से शुल्क वसूल किया जाएगा। पीआरएस कांउटर या आई-टिकट द्वारा आरक्षित एसी श्रेणी के टिकटों की खरीद के समय हालांकि पहचानपत्र (मूल या छायाप्रति) की आवश्यकता नहीं है। जिन मामलों में यात्रियों को स्वत: शयनयान श्रेणी से वातानुकूलित श्रेणी में अपग्रेड किया गया हो और साथ ही उन मामलों में भी, जिनमें यात्रा के दौरान टिकट जांच कर्मचारी द्वारा यात्री के यात्रा भाड़े में अंतर पाए जाने पर उन्हें अपग्रेड किया गया हो, यात्रा के दौरान पहचान साक्ष्य रखने की आवश्यकता नहीं है।यह नया निर्देश पहले से मौजूद निर्देशों के अतिरिक्त हैं, जिसके तहत तत्काल टिकट और ई-टिकट बुकिंग कराने वाले यात्रियों को यात्रा के दौरान मूल पहचान पत्र अपने पास रखना होता है। तत्काल टिकट के मामले में पीआरएस कांउटरों से टिकट की खरीद के समय पहचानपत्र की स्वयं द्वारा सत्यापित प्रति प्रस्तुत करनी होती है और इंटनेट से टिकट आरक्षित करने पर पहचानपत्र का ब्योरा (संख्या आदि) अंकित करना होता है।बताया गया है कि कंप्यूटरीकृत पीआरएस या आई-टिकटों के द्वारा जारी किए गए टिकटों पर इस आशय का संदेश निर्देशित किया जाएगा। रेल मंत्रालय के तहत रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) को सॉफ्टवेयर में आवश्यक प्रावधान करने का निर्देश दिया गया है।
वैध पहचानपत्र:-
- भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा जारी मतदाता पहचानपत्र
- पासपोर्ट
- आयकर विभाग द्वारा जारी पैनकार्ड
- क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द्वारा जारी ड्राइविंग लाइसेंस
- केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी फोटो पहचानपत्र जिसमें क्रम संख्या अंकित हो
- मान्यता प्राप्त विद्यालयों/कॉलेजों द्वारा छात्रों को जारी फोटो पहचानपत्र
-राष्ट्रीयकृत बैंक की पासबुक (फोटो युक्त)
- बैंकों द्वारा जारी क्रेडिट कार्ड-लेमिनेटेड (फोटो युक्त)
- विशिष्ट पहचानपत्र 'आधार

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

भारतीय डाक की अनोखी दुनिया

चार दिवसीय बिहार डाक टिकट प्रदर्शनी में राज्यवासी डाक टिकटों की अनोखी प्रदर्शनी देखेंगे। पटना विश्वविद्यालय के व्हीलर सीनेट हाल में आयोजित प्रदर्शनी का आज १०-०२-२०१२ (शुक्रवार) को बिहार के राज्यपाल श्री देबानंद कुंवर करेंगे। यह जानकारी गुरुवार ०९-०२-२०१२ को प्रेसकांफ्रेंस आयोजित कर बिहार के चीफ पोस्ट मास्टर जनरल श्रीमती कावेरी बनर्जी और डाक निदेशक श्री अनिल कुमार ने दी।
श्रीमती बनर्जी ने कहा कि डाक टिकट प्रदर्शन का आयोजन बिहार के शताब्दी वर्ष के अवसर पर किया जा रहा है। इतिहास को डाक टिकट प्रदर्शनी में बिहार का गौरवशाली इतिहास प्रदर्शित किया जायेगा।
डाक प्रदर्शनी में राज्य के विभिन्न विद्यालयों के चार हजार छात्र-छात्राएं विभिन्न प्रतियोगिता में भाग लेंगे। देश व विदेश के डेढ़ दर्जन डाक संग्रहक दुर्लभ डाक टिकटों को प्रदर्शित करेंगे। युवा और विद्यार्थी वर्ग के लिए भी डाक टिकट प्रदर्शनी आकर्षण का केन्द्र रहेगा। यहां अति दुर्लभ डाक टिकट भी देखने को मिलेंगे। इसमें विश्व का प्रथम कापर का डाक टिकट और स्वतंत्र भारत का प्रथम डाक टिकट गांधी सर्विस ओवरप्रिंट भी प्रदर्शित किया जायेगा। इसे 1948 में तत्कालीन गर्वनर जनरल सी. राजगोपालचारी ने अपने उपयोग के लिए बनवाया था। गाधी जी द्वारा लिखा गया पत्रे भी प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया जायेगा। यहां महारानी विक्टोरिया के उल्टे सिर वाला प्रकाशित टिकट भी लोग देख सकेंगे।
श्रीमती बनर्जी ने कहा ने कहा कि इस प्रदर्शनी में डाक टिकट के साथ अपनी तस्वीर वाला टिकट भी निकलवाने की व्यवस्था है। लोगों की ओर से इसकी जबरदस्त मांग है। लोग जन्म दिन, वेलेंटाइन डे, मैरेज डे आदि पर देने के लिए डाक टिकट अपनी तस्वीर के साथ बनवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी के दौरान पत्र लेखन, पेंटिंग, क्विज, डांस, म्यूजिक का आयोजन किया जाय।
प्रतिदिन विशिष्ट आवरण होगा विमोचन
बिहार डाक टिकट प्रदर्शनी में प्रतिदिन बिहार के गौरवशाली इतिहास पर विशिष्ट आवरण का विमोचन होगा। प्रथम दिन का आवरण राज्यपाल देबानंद कुंवर जारी करेंगे तथा मुख्य अतिथि पटना विश्वविद्यालय के कुलपति शंभूनाथ सिंह होंगे। शनिवार को विशिष्ट आवरण का विमोचन डीजीपी अभयानंद तथा विशेष पोस्टकार्ड का विमोचन वरुण भरथुआर करेंगे। रविवार को विशिष्ट आवरण का विमोचन मुख्य सचिव नवीन कुमार तथा स्टांप का विमोचन भारतीय स्टेट बैंक के सीजीएम जीवन दास करेंगे। सोमवार को विशिष्ट आवरण बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल तथा विशेष पोस्ट कार्ड का विमोचन कैबिनेट सचिव रविकांत करेंगे।

बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

डाक प्रदर्शनी में दिखेगा बिहार का गौरवशाली इतिहास

डाक प्रदर्शनी में दिखेगा बिहार का गौरवशाली इतिहास
बिहार के शताब्दी वर्ष पर पटना विश्वविद्यालय के व्हीलर सीनेट हाल में दस फरवरी से आयोजित होने वाला चार दिवसीय बिहार डाक टिकट प्रदर्शनी 2012 कई मायनों में अलग होगा। डाक विभाग इस प्रदर्शनी के माध्यम से बिहार की गौरवशाली इतिहास को सामने रखेगा।
डाक प्रदर्शनी में यहां के कलाओं को प्रदर्शित करने की तैयारी है। प्रदर्शनी में आने के साथ बिहार के गौरवशाली इतिहास से लोग अवगत हो जायेंगे। बौद्ध, जैन सहित कई धर्मो, कलाकृतियों, चित्रकला आदि को डाक टिकट के माध्यम से दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है। यहां डाक टिकटों के संग्रह को भी प्रस्तुत जा रहा है। देश-विदेश से लोग यहां डाक टिकट के साथ भाग लेने के लिए आ रहे हैं।
डाक टिकट प्रदर्शनी के बहाने लोग डाक टिकट के साथ अपनी तस्वीर प्रकाशित कराने के लिए आवेदन दे रहे हैं। बुधवार को 1500 से अधिक लोग आवेदन दे चुके हैं। प्रदर्शनी में चार हजार स्कूली बच्चे पत्र लेखन प्रतियोगिता, पेंटिंग प्रतियोगिता, क्वीज, डांस, म्यूजिक में भाग लेंगे। दस फरवरी तक स्कूली बच्चे इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आवेदन दे सकते हैं।
प्रदर्शनी में अति दुर्लभ डाक टिकट प्रदर्शित किये जायेंगे। पटना को जब अजीमाबाद नाम से जाना जाता था तब 1774 में कापर का डाक टिकट निकला था। यह विश्व का प्रथम कापर पर निकलने वाला डाक टिकट है। प्रदर्शनी में इनवर्टेड हेड, गांधी सर्विस ओभरप्रिंट और गांधी जी का हस्तलिखित पत्र लोगों को आकर्षित करेगा। इन टिकटों की कीमत लाखों व करोड़ों में है।

शांति का प्रयास

१२ वर्षों के ज्ञातवास और १ वर्ष के अज्ञातवास की शर्त पूरी करने पर भी जब कौरवों ने पाण्डवों को उनका राज्य देने से मना कर दिया तो पाण्डवों को युद्ध करने के लिये बाधित होना पड़ा। परन्तु श्रीकृष्ण ने कहा कि यह युद्ध सम्पूर्ण विश्व सभ्यता के विनाश का कारण बन सकता है अतः उन्होने युद्ध रोकने का हर सम्भव प्रयास करने का सुझाव दिया। श्रीकृष्ण ने कहा कि दुर्योधन को एक अन्तिम अवसर अवश्य देना चाहिए, इसलिये श्रीकृष्ण पाण्डवों की तरफ से कुरुराज्य सभा में शांतिदूत बनकर गये और दुर्योधन से पाण्डवों के सामने केवल पाँच गाँव देकर युद्ध टालने का प्रस्ताव रखा। जब दुर्योधन ने पाण्डवों को सुई की नोंक जितनी भी भूमि देने से मना कर दिया तो श्रीकृष्ण ने उसे समझाया कि दुर्योधन के इस हठ के कारण उसके वंश और साथियों के साथ-साथ कई निर्दोष लोगों को युद्ध की बलि चढ़ना पड़ेगा। इस बात क्रोधित होकर दुर्योधन ने श्रीकृष्ण को बन्दी बनाने की कोशिश की परन्तु श्रीकृष्ण माया का प्रयोग करके सबको अपने विराट रुप से भयभीत कर वहाँ से चले गये। इसके बाद तो युधिष्ठिर को युद्ध करने के लिये विवश होना ही पड़ा। उसी समय भगवान् वेदव्यास ने धृतराष्ट्र के पास जाकर कहा कि तुम्हारे पुत्रों ने समस्त गुरुजनों की बातों की अवहेलना करके अन्ततः महाविनाशकारी युद्ध को खड़ा ही कर दिया। धृतराष्ट्र के युद्ध की संसूचना जानने की विनती करने पर वेदव्यास जी ने उन्हे कहा कि यदि तुम इस महायुद्ध को देखना चाहते हो तो मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि प्रदान कर सकता हूँ। इस पर धृतराष्ट्र ने कहा कि इसमें मेरे ही कुल का विनाश होना है, इसलिये मैं इस युद्ध अपनी आँखों से नहीं देखूँगा। अतः आप कृपा करके ऐसी व्यवस्था कर दें कि मुझे इस युद्ध का समाचार मिलता रहे। यह सुनकर वेदव्यास जी ने संजय को बुलाकर उसे दिव्य दृष्टि दे दी और कहा, “हे धृतराष्ट्र! मैंने संजय को दिव्य दृष्टि प्रदान कर दिया है। सम्पूर्ण युद्ध क्षेत्र में कोई भी बात ऐसी न रहेगी जो इससे छुपी रहे। यह तुम्हें इस महायुद्ध का सारा वृत्तान्त सुनायेगा।” इतना कहकर वेदव्यास जी चले गये।
c:wiki

अब रेल टिकट १२० दिन पहले से भी मिलेगा

अब रेल टिकट बुकिंग 120 दिन पहले
अंतिम बार अपडेट: Tuesday, February 7, 2012,
रेलवे ने टिकटों की मांग को पूरा करने के लिए 10 मार्च से इसके अग्रिम आरक्षण की अवधि को 90 दिन से बढ़ाकर 120 दिन करने का फैसला किया है।
रेल मंत्रालय के वाणिज्यिक विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अब कोई व्यक्ति अपना ट्रेन टिकट यात्रा से 120 दिन पहले आरक्षित कर सकेगा क्योंकि हमने यात्रियों को चार महीने पहले अपनी यात्रा की योजना बनाने का अवसर मुहैया करने का फैसला किया है।
रेल सूचना प्रणाली केंद्र (क्रिस) इस सिलसिले में सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव करेगा। उन्होंने बताया कि चार महीने की अग्रिम आरक्षण अवधि से उन लोगों को भी मदद मिलेगी जो त्योहारों या गर्मियों की छुट्टियों के दौरान यात्रा करते हैं। अधिकारी ने बताया कि हालांकि ताज एक्सप्रेस और गोमती एक्सप्रेस जैसी कम दूरी की ट्रेनों के लिए सीटों के आरक्षण की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा।
इन ट्रेनों के लिए अग्रिम आरक्षण की अवधि 15 दिन है और इसमें बदलाव नहीं होगा। विदेशी पर्यटकों के लिए 360 दिनों की सीमा में भी कोई बदलाव नहीं होगा। गौरतलब है कि तत्काल बुकिंग की अवधि 48 घंटे से घटाकर 24 घंटे पहले ही की जा चुकी है।
भारतीय रेल का स्वर्ण युग २००४-२००९ मन जाता है जब रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद यादव थे।