बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

डाक प्रदर्शनी में दिखेगा बिहार का गौरवशाली इतिहास

डाक प्रदर्शनी में दिखेगा बिहार का गौरवशाली इतिहास
बिहार के शताब्दी वर्ष पर पटना विश्वविद्यालय के व्हीलर सीनेट हाल में दस फरवरी से आयोजित होने वाला चार दिवसीय बिहार डाक टिकट प्रदर्शनी 2012 कई मायनों में अलग होगा। डाक विभाग इस प्रदर्शनी के माध्यम से बिहार की गौरवशाली इतिहास को सामने रखेगा।
डाक प्रदर्शनी में यहां के कलाओं को प्रदर्शित करने की तैयारी है। प्रदर्शनी में आने के साथ बिहार के गौरवशाली इतिहास से लोग अवगत हो जायेंगे। बौद्ध, जैन सहित कई धर्मो, कलाकृतियों, चित्रकला आदि को डाक टिकट के माध्यम से दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है। यहां डाक टिकटों के संग्रह को भी प्रस्तुत जा रहा है। देश-विदेश से लोग यहां डाक टिकट के साथ भाग लेने के लिए आ रहे हैं।
डाक टिकट प्रदर्शनी के बहाने लोग डाक टिकट के साथ अपनी तस्वीर प्रकाशित कराने के लिए आवेदन दे रहे हैं। बुधवार को 1500 से अधिक लोग आवेदन दे चुके हैं। प्रदर्शनी में चार हजार स्कूली बच्चे पत्र लेखन प्रतियोगिता, पेंटिंग प्रतियोगिता, क्वीज, डांस, म्यूजिक में भाग लेंगे। दस फरवरी तक स्कूली बच्चे इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आवेदन दे सकते हैं।
प्रदर्शनी में अति दुर्लभ डाक टिकट प्रदर्शित किये जायेंगे। पटना को जब अजीमाबाद नाम से जाना जाता था तब 1774 में कापर का डाक टिकट निकला था। यह विश्व का प्रथम कापर पर निकलने वाला डाक टिकट है। प्रदर्शनी में इनवर्टेड हेड, गांधी सर्विस ओभरप्रिंट और गांधी जी का हस्तलिखित पत्र लोगों को आकर्षित करेगा। इन टिकटों की कीमत लाखों व करोड़ों में है।

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